झारखंड में मातृ स्वास्थ्य को लेकर बड़ा कदम, सहिया कर्मियों को मिलेगा डिजिटल सपोर्ट
Major Step for Maternal Health in Jharkhand
रांची। Major Step for Maternal Health in Jharkhand, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि उनकी सरकार ने हाल ही में 42 हजार सहिया को एकमुश्त पारिश्रमिक राशि प्रदान की। अब सरकार एक माह के भीतर सभी सहिया को टैब उपलब्ध कराएगी।
टैब में कई ऐप रहेंगे, जिनके माध्यम से सहिया के सारे कार्य डिजिटल हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य में झारखंड बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। किसी महिला की प्रसव के दौरान या बाद में न हो, इसे भी सुनिश्चित किया जाएगा।
मंत्री शनिवार को यूनिसेफ के सहयोग से राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान, झारखंड द्वारा होटल बीएनआर में राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मातृ मृत्यु दर को शून्य के करीब लाना सरकार का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि राज्य में सिकल सेल व थैलेसीमिया मरीजों का कोई आंकड़ा नहीं था। अब सरकार ने सभी जिलों में इसकी स्क्रीनिंग का निर्णय लिया है।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान में झारखंड स्वास्थ्य सेवाओं में देश में तीसरे स्थान पर है, लेकिन उनका लक्ष्य इसे पहले स्थान पर पहुंचाना है।
उन्होंने मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना से माताओं एवं बहनों को सम्मान मिला है।
इस मौके पर अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि किसी भी राज्य के वास्तविक विकास का आकलन उसके बुनियादी ढांचे से नहीं, बल्कि मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर जैसे स्वास्थ्य सूचकों से किया जाता है।
इसमें झारखंड की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन वैश्विक मानकों तक पहुंचने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है।
प्रति वर्ष दो लाख प्रसव हाई रिस्क के दायरे में
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि झारखंड में प्रतिवर्ष आठ से नौ लाख प्रसव होते हैं। इनमें लगभग दो लाख प्रसव हाई रिस्क दायरे में आते हैं।
हाई रिस्क प्रसव की समय पर पहचान और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लक्ष्य है कि मातृ मृत्यु दर को सिंगल डिजिट तक लाया जाए, जैसा केरल जैसे राज्यों में संभव हुआ है।
यूनिसेफ की सीएफओ प्रभारी पारूल शर्मा ने कहा कि झारखंड मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक उभरता हुआ माडल बन रहा है।
उन्होंने कहा कि “मातृत्व कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत है। इसलिए एक भी मातृ मृत्यु स्वीकार्य नहीं है।”
56.8 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रसित
इस अवसर पर उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल से संबंधित एक माड्यूल का भी विमोचन किया गया।
इसमें कहा गया है कि झारखंड में 56.8 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रसित व 26 प्रतिशत कुपोषित हैं। अभी भी 38.4 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं चार बार प्रसव पूर्व जांच कराती हैं।
पूरे गर्भावस्था में सिर्फ 14.9 प्रतिशत महिलाएं ही आयरन की 180 गोली का सेवन करती है।
प्रसव के दौरान म्यूजिक थेरेपी पर चर्चा
कार्यक्रम में एम्स, नई दिल्ली के चिकित्सक डा. सौरभ सरकार ने प्रसव के दौरान म्यूजिक थेरेपी के महत्व को इंगित किया।
कार्यक्रम में केडिया बंधु द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पंडित मिथिलेश झा (तबला) की संगत ने आयोजन को और भी गरिमामयी बना दिया। संगीत ने मातृत्व के दौरान सकारात्मकता और मानसिक सुकून के महत्व को दर्शाया।